शिव तांडवक(क्रीड़ा - बंधु मातु के प्रकाशवान अम्बक से।
अनुजों के ताप के समूल नाशकारी हो॥)
हे जग जननी हे जग पालनि हे जग सँहारिन हे अम्बे,
करता हूँ मैं तेरा पूजन स्वीकार करो हे जगदम्बे
इस भवसागर को पार करूँ यदि तेरा सहारा मिल जाये ,जीवन में खुशियां छा जाये यदि तेरा सहारा मिल जाये
कट गए दुःख मेरे सारे हरि नाम पुकारे, राधा ने श्याम नाम मीरा ने गिरिधर, रंजन हरी को पुकारे
जय जय ज्योतिर्लिंग महान शिव शंकर का धर लो ध्यान आएंगे वो तेरे काम, जय जय ज्योतिर्लिंग महान
भक्त बड़े चालाक लेने माँ का आशीर्वाद देखो कब से खड़े हैं दरबार में, मांगे भक्ति वो दीन पुकार में
करलो भक्तो मां का ध्यान आज नवरात्रि आई है
आज नवरात्रि आई है घर घर कलसो का साज आज नवराति आई है
बहुत दिन धोखे में रह लीन्हा
अपने-अपने सुत की खातिर जग से छल बल कीन्हा वही पुत्र जब बड़े भये
मइया आन बसो मेरे शिव मठ में
मेरी उमर बीत गयी भजनन मे मइया आके दरश दिखा जाना
भक्त ने पुकारा भोले दौडे चले आए है।
हाथ से हमारे भोले रोज खाना खाए है मीरा ने पुकारा देखो भोले कान्हा बनके
मेरी माँ तुझे अब तो आना पड़ेगा
दुखी भक्त तेरे बचाना पड़ेगा मुझे मात केवल सहारा है तेरा नहीं इस जगत मे...
रे मानव कर ले हरि का ध्यान रे मानव कर ले हरि का ध्यान
बीत गयी तेरी आधी उमरिया ढोढो कर सामान
हे ब्रह्मचारिणी ममता की मूर्ति,
साधन तपस्या की है तू सूरत, आ जाना आ जाना ......