🔱 शिव भजन (रचनाकार- भगवान शिव)🔱

शिव तांडवक(क्रीड़ा - बंधु मातु के प्रकाशवान अम्बक से। अनुजों के ताप के समूल नाशकारी हो॥)
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हे जग जननी हे जग पालनि हे जग सँहारिन हे अम्बे, करता हूँ मैं तेरा पूजन स्वीकार करो हे जगदम्बे
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इस भवसागर को पार करूँ यदि तेरा सहारा मिल जाये ,जीवन में खुशियां छा जाये यदि तेरा सहारा मिल जाये
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कट गए दुःख मेरे सारे हरि नाम पुकारे, राधा ने श्याम नाम मीरा ने गिरिधर, रंजन हरी को पुकारे
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जय जय ज्योतिर्लिंग महान शिव शंकर का धर लो ध्यान आएंगे वो तेरे काम, जय जय ज्योतिर्लिंग महान
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भक्त बड़े चालाक लेने माँ का आशीर्वाद देखो कब से खड़े हैं दरबार में, मांगे भक्ति वो दीन पुकार में
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करलो भक्तो मां का ध्यान आज नवरात्रि आई है आज नवरात्रि आई है घर घर कलसो का साज आज नवराति आई है
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बहुत दिन धोखे में रह लीन्हा अपने-अपने सुत की खातिर जग से छल बल कीन्हा वही पुत्र जब बड़े भये
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मइया आन बसो मेरे शिव मठ में मेरी उमर बीत गयी भजनन मे मइया आके दरश दिखा जाना
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भक्त ने पुकारा भोले दौडे चले आए है। हाथ से हमारे भोले रोज खाना खाए है मीरा ने पुकारा देखो भोले कान्हा बनके
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मेरी माँ तुझे अब तो आना पड़ेगा दुखी भक्त तेरे बचाना पड़ेगा मुझे मात केवल सहारा है तेरा नहीं इस जगत मे...
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रे मानव कर ले हरि का ध्यान रे मानव कर ले हरि का ध्यान बीत गयी तेरी आधी उमरिया ढोढो कर सामान
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हे ब्रह्मचारिणी ममता की मूर्ति, साधन तपस्या की है तू सूरत, आ जाना आ जाना ......
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शिव भजन 222
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