उज्जैन नगरी में विराजमान भगवान शिव का महाकाल स्वरूप
श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के तृतीय ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजित है। यह दिव्य ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश की पवित्र अवंति नगरी अर्थात् उज्जैन में स्थित है। शिवपुराण में वर्णित कथा के अनुसार भगवान शिव ने अपने भक्तों की रक्षा हेतु महाकाल स्वरूप धारण कर यहाँ प्रकट होकर अधर्म का विनाश किया था।
प्राचीन काल में उज्जैन नगरी में वेदप्रिय नामक एक महान ब्राह्मण निवास करते थे। वे अत्यंत शिवभक्त थे और प्रतिदिन भगवान शिव की आराधना, वेदपाठ तथा यज्ञ करते थे। उनके चार पुत्र भी धर्म, तप और शिवभक्ति में लीन रहते थे। उस समय दूषण नामक एक अत्याचारी राक्षस ने तपस्वियों और धार्मिक लोगों को अत्यंत कष्ट देना प्रारंभ कर दिया था।
दूषण राक्षस ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त कर अत्यंत शक्तिशाली बन गया था। वह यज्ञ, पूजा और वेदमार्ग का विरोध करता था। जब उसने उज्जैन में रहने वाले ब्राह्मणों और शिवभक्तों को सताना शुरू किया, तब समस्त भक्त भगवान शिव की शरण में पहुँचे।
भक्तों की करुण पुकार सुनते ही पृथ्वी कंपित होने लगी और एक विशाल गर्जना के साथ भगवान शिव महाकाल रूप में प्रकट हुए। उनके तेज से समस्त दिशाएँ प्रकाशित हो उठीं। भगवान शिव ने अपने त्रिशूल और दिव्य शक्ति से दूषण राक्षस का संहार कर दिया तथा भक्तों को भयमुक्त किया।
भगवान शिव के इस अद्भुत महाकाल स्वरूप को देखकर सभी देवता, ऋषि और भक्त अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे सदैव इसी स्थान पर विराजमान होकर भक्तों की रक्षा करें। भक्तों की प्रार्थना स्वीकार कर भगवान शिव वहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में स्थापित हो गए और “महाकालेश्वर” नाम से प्रसिद्ध हुए।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की सबसे विशेष बात यह मानी जाती है कि यह दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। यहाँ होने वाली प्रसिद्ध “भस्म आरती” विश्वभर के शिवभक्तों के लिए अत्यंत आकर्षण और श्रद्धा का केंद्र है।
उज्जैन की यह पवित्र नगरी प्राचीन काल से ज्योतिष, धर्म, साधना और सनातन संस्कृति का महान केंद्र रही है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन भक्तों को भय, दुख और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है।