भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित भगवान शिव का दिव्य रामेश्वर स्वरूप
श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के एकादश ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है। यह पवित्र धाम तमिलनाडु के समुद्र तट पर स्थित है और रामायण काल से जुड़ा हुआ अत्यंत महान तीर्थ माना जाता है। यहाँ भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व भगवान शिव की आराधना कर शिवलिंग की स्थापना की थी।
रामायण के अनुसार जब रावण माता सीता का हरण कर लंका ले गया, तब भगवान श्रीराम वानर सेना सहित समुद्र तट पर पहुँचे। लंका तक पहुँचने के लिए समुद्र पार करना आवश्यक था। उस समय भगवान श्रीराम ने विजय और कल्याण के लिए भगवान शिव की पूजा करने का संकल्प लिया।
भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को कैलाश पर्वत से शिवलिंग लाने के लिए भेजा। किंतु हनुमान जी के लौटने में विलंब होने पर माता सीता ने समुद्र तट की रेत से एक शिवलिंग निर्मित किया। उसी शिवलिंग की भगवान श्रीराम ने विधिपूर्वक पूजा और अभिषेक किया।
पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव वहाँ प्रकट हुए और भगवान श्रीराम को विजय का आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि जो भक्त इस पवित्र स्थान पर श्रद्धा से दर्शन और पूजा करेगा, उसे विशेष पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होगी।
भगवान शिव उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में स्थापित हुए और “रामेश्वर” नाम से प्रसिद्ध हुए। “रामेश्वर” का अर्थ है—भगवान श्रीराम के ईश्वर अर्थात् भगवान शिव।
रामेश्वरम मंदिर अपनी भव्य स्थापत्य कला, विशाल गलियारों और पवित्र तीर्थ कुओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव प्राप्त करते हैं।
श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का दर्शन भक्तों को पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और भगवान शिव की कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है। यह दिव्य धाम रामभक्ति और शिवभक्ति के अद्भुत संगम का अमर प्रतीक है।