श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

भगवान शिव का दिव्य नागेश्वर स्वरूप और भक्त रक्षा की महान कथा

श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की पावन कथा

श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के दशम ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है। यह पवित्र धाम गुजरात में द्वारका के निकट स्थित माना जाता है। शिवपुराण के अनुसार यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की भक्तवत्सलता, रक्षा शक्ति और दिव्य करुणा का महान प्रतीक है।

प्राचीन काल में “दारुक” नामक एक अत्यंत क्रूर राक्षस और उसकी पत्नी “दारुका” समुद्र के समीप एक वन क्षेत्र में निवास करते थे। वे अपने अत्याचारों से ऋषियों, साधुओं और भक्तों को अत्यंत कष्ट देते थे। दारुका को देवी पार्वती से वरदान प्राप्त था, जिसके कारण उसका आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता गया।

एक समय राक्षसों ने अनेक शिवभक्तों को बंदी बना लिया। उन्हीं बंदियों में “सुप्रिया” नामक भगवान शिव का महान भक्त भी था। कारागार में रहते हुए भी सुप्रिया निरंतर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करता रहा और अन्य बंदियों को भी भगवान शिव की भक्ति के लिए प्रेरित करता रहा।

“ॐ नमः शिवाय” का सच्चे हृदय से किया गया स्मरण भक्त को हर संकट से बचाता है।

जब राक्षसों को यह ज्ञात हुआ कि बंदी शिवभक्ति कर रहे हैं, तब वे अत्यंत क्रोधित हो गए और सुप्रिया को मारने का प्रयास करने लगे। उसी समय सुप्रिया ने पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का स्मरण किया।

भक्त की पुकार सुनकर भगवान शिव वहाँ दिव्य ज्योति के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने राक्षसों का संहार कर अपने भक्तों की रक्षा की। देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव की स्तुति की तथा उनसे उसी स्थान पर सदैव विराजमान रहने की प्रार्थना की।

🐍 “नागेश्वर” → नागों के ईश्वर भगवान शिव

🔱 यह ज्योतिर्लिंग भक्त रक्षा, निर्भयता और शिव कृपा का प्रतीक माना जाता है।

भगवान शिव भक्तों के कल्याण हेतु वहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में स्थापित हो गए और “नागेश्वर” नाम से प्रसिद्ध हुए। शिवपुराण में कहा गया है कि इस ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने से भय, पाप और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह पवित्र धाम भगवान शिव की असीम करुणा, भक्तवत्सलता और धर्म रक्षा की दिव्य परंपरा का उज्ज्वल प्रतीक माना जाता है।