Mahant Rajesh Kumar Tiwari Ranjan

Mahant Rajesh Kumar Tiwari “Ranjan”

IBR Achiever | Author | Poet | Yogacharya | Spiritual Scholar

Recognized by India Book of Records for achieving 18 academic certificates

Mahant of Jyotirling Shivmath Since 1998

Mahant Ji Photo Gallery

Introduction

Mahant Rajesh Kumar Tiwari “Ranjan” is an Indian author, poet, spiritual scholar and IBR Achiever recognized by India Book of Records for achieving 18 academic certificates comprising degrees and diplomas from various institutions between 1985 and 2024.

He has contributed in the fields of literature, spirituality, yoga, Sanskrit studies and Indian philosophy. He is also known as the composer of the original Shivtandavak Stotra dedicated to Lord Shiva.

Since 1998, he has been serving as the Mahant of Jyotirling Shivmath, Lucknow.

India Book of Records Achievement

Application ID: 108203

Mahant Rajesh Kumar Tiwari “Ranjan” was officially recognized as an “IBR Achiever” by India Book of Records.

This recognition was granted for achieving 18 academic certificates, including degrees and diplomas from various schools, colleges and universities between 1985 and 2024 (Now it is 20).

The achievement was confirmed by the Editorial Board of India Book of Records on September 23, 2025 after verification of educational records and submitted evidence.

18 Academic Certificates
Degrees & Diplomas (1985–2024)

Educational Qualifications

Qualification Institution / University
MSc (Maths) UPRTOU
MBA (Information System) Sikkim Manipal University
LLB RML University, Faizabad
M.A. (Psychology) IGNOU
M.A. (Sanskrit) IGNOU
M.A. (Yoga) UPRTOU
M.A. (Jyotish) IGNOU
M.A. (Hindi Sahitya) Hindi Sahitya Sammelan, Allahabad
M.A. (Philosophy) Kanpur University
M.A. (Political Science) Kanpur University
M.A. (Sociology) Kanpur University
M.A. (Bhagavdgita) IGNOU
B.Sc. (Physics, Maths, EVS) UPRTOU
B.A. (Hindi, Philosophy, Political Science) CSJM University, Kanpur
Madhyama Visharad Hindi Sahitya Sammelan, Allahabad
Diploma O Level National Institute of Electronic and Information Technology (NIELIT)
Diploma in RTI National Institute of Public Administration
Intermediate (Biology + Sanskrit) UP Board Allahabad
Intermediate (Science + Maths) UP Board Allahabad
High School (Science) UP Board Allahabad

📚 मेरी साहित्य-साधना

महंत राजेश कुमार तिवारी ‘रंजन’ की साहित्यिक यात्रा विभिन्न काव्य, भक्ति, चिंतन और जीवनानुभवों से होकर निरंतर आगे बढ़ रही है। यहाँ उनकी प्रकाशित पुस्तकों के साथ उनके उपलब्ध डिजिटल एवं प्रिंट संस्करणों की जानकारी दी गई है।

✦ प्रकाशित पुस्तकें ✦

भक्ति सागर द्वितीय - पुस्तक कवर

भक्ति सागर – द्वितीय

भक्ति, आध्यात्मिक अनुभूति और काव्य-संवेदना से ओत-प्रोत साहित्यिक कृति।

ISBN: 978-93-345-4077-2
ASIN: B0HLVPTP31
Google Play ID: GGKEY:3TRENULD94L
भक्ति सागर प्रथम - पुस्तक कवर

भक्ति सागर – प्रथम

भक्ति-भावना और आध्यात्मिक अनुभूति का काव्य-संग्रह।

ISBN: 978-93-345-3308-8
Google Play ID: GGKEY:UAR6XBWNHLS
पावस तरंग प्रबंध काव्य - पुस्तक कवर

पावस तरंग

प्रबंध काव्य — प्रकृति, भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और जीवनानुभूतियों की काव्यमयी अभिव्यक्ति।

ISBN: 978-93-345-1737-8
Amazon ASIN: B0HLF4PKFP
Google Play ID: GGKEY:KPY0KDTQ90S
Pothi eBook: ebook22592
Pothi Print: SKU47983
वंदना खंड काव्य - पुस्तक कवर

वंदना – खंड काव्य

श्रद्धा, अनुभूति और काव्यात्मक संवेदना से सुसज्जित खंड काव्य।

ISBN: 978-93-344-9818-9
ASIN: B0HHN8WT5D
Google Play ID: GGKEY:TP565W89Y03
गूँजे ध्वजा मम भारती - पुस्तक कवर

गूँजे ध्वजा मम भारती

राष्ट्रभावना, संस्कृति और काव्य-संवेदना से जुड़ी साहित्यिक कृति।

ISBN: 978-93-344-9161-6
ASIN: B0HHLTXCPM
Google Play ID: GGKEY:XRP08X9H31K
जड़ावरण - पुस्तक कवर

जड़ावरण

17 वर्षीय रचनाकार की आरंभिक काव्य-यात्रा, प्रकृति, प्रेम, विरह और संवेदना की अभिव्यक्ति।

ISBN: 978-93-344-6264-7
ASIN: B0HF8FQWFP
Google Play ID: GGKEY:Q6AG996XDG4
Pothi SKU: ebook21582
ग़ज़ल-ए-रंजन - पुस्तक कवर

ग़ज़ल-ए-रंजन

भावनाओं, अनुभूतियों और ग़ज़ल की काव्यात्मक शैली का संग्रह।

ISBN: 978-93-345-4554-8
ASIN: B0HJ5T26XH
Google Play ID: GGKEY:S6JY1SC5K8X
राम जन्मभूमि - पुस्तक कवर

राम जन्मभूमि

राम जन्मभूमि के इतिहास और उससे जुड़े साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रसंगों पर आधारित कृति।

ISBN:: 978-93-345-6536-2 ASIN: B0HFNFGBH7
Google Play ID: GGKEY:LTFJDT4DC4N
🌈
इंद्रधनुष
प्रकाशित — 1990

इंद्रधनुष

वर्ष 1990 में प्रकाशित प्रारंभिक साहित्यिक कृति।

प्रकाशन वर्ष: 1990
ISBN:: 978-93-345-5111-2

✦ आगामी साहित्यिक कृतियाँ ✦

ये कृतियाँ अभी प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं। इनके प्रकाशित होने पर यहाँ इनके cover, ISBN और उपलब्धता के links भी जोड़े जाएँगे।

अवहेलना कुण्डली शतक मेरी पूर्णागिरि यात्रा मेरे संस्मरण

“साहित्य केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि अंतश्चेतना, अनुभूति और जीवन-दर्शन की अभिव्यक्ति है।”

— महंत राजेश कुमार तिवारी ‘रंजन’

Shivtandavak Stotra

Shivtandavak is an original devotional composition dedicated to Lord Shiva and composed by Mahant Rajesh Kumar Tiwari “Ranjan”. This literary work is different from the traditional Ravana Shiv Tandav Stotra and represents an independent spiritual and poetic creation based on devotion towards Lord Shiva.

The original composition of Shivtandavak was written in 1988 at the age of 17 while the author was studying B.Sc. at Christian PG College, Lucknow. The composition reflects elements of Sanskritic expression, spiritual philosophy, devotion, poetic rhythm and traditional Shaiva thought.

Shivtandavak is regularly recited at Jyotirling Shivmath and is regarded as one of the significant literary-spiritual works composed by the author.


‘शिवताण्डवक’ भगवान शिव को समर्पित एक मौलिक काव्य रचना है, जिसके रचनाकार महंत राजेश कुमार तिवारी “रंजन” हैं। यह रचना पारंपरिक रावण कृत शिव तांडव स्तोत्र से भिन्न एक स्वतंत्र आध्यात्मिक एवं साहित्यिक कृति है।

इसकी मूल रचना वर्ष 1988 में उस समय की गई थी जब रचनाकार की आयु 17 वर्ष थी तथा वे क्रिश्चियन पी.जी. कॉलेज, लखनऊ में बी.एससी. के छात्र थे। इस रचना में संस्कृतनिष्ठ अभिव्यक्ति, आध्यात्मिक दर्शन, शिवभक्ति तथा पारंपरिक शैव चिंतन की विशेष झलक मिलती है।

‘शिवताण्डवक’ का पाठ ज्योतिर्लिंग शिवमठ में नियमित रूप से किया जाता है तथा इसे रचनाकार की प्रमुख आध्यात्मिक-साहित्यिक कृतियों में माना जाता है।

Original devotional composition dedicated to Lord Shiva.

Read Shivtandavak Stotra →

Kavi Mahant Rajesh Kumar Tiwari "Ranjan" ke bare me

लेखक, कवि, योगाचार्य, आध्यात्मिक विद्वान, 'इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स' (IBR) के कीर्तिमानधारी एवं ज्योतिर्लिंग शिवमठ, लखनऊ के महंत

महंत राजेश कुमार तिवारी "रंजन" (जिन्हें लोग Mahant Rajesh Kumar Tiwari या Rajesh Kumar Tiwari Ranjan के नाम से भी जानते हैं) एक भारतीय लेखक, कवि, आध्यात्मिक विद्वान, योगाचार्य और ज्योतिर्लिंग शिवमठ, लखनऊ के महंत हैं। यह शिवमठ भगवान शिव और सनातन धर्म की जीवंत परंपराओं को समर्पित एक आध्यात्मिक केंद्र है। वह 1998 से इसके महंत के रूप में सेवा दे रहे हैं. उनका जीवन आध्यात्मिकता, साहित्य, कविता, शिक्षा, सांस्कृतिक चेतना, बौद्धिक अन्वेषण और सेवा का एक अनूठा संगम है. अपने साहित्यिक नाम “रंजन” से विख्यात, Rajesh Kumar Tiwari Ranjan ने साहित्य, दर्शन, मनोविज्ञान, संस्कृत, योग, ज्योतिष, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, कानून, प्रबंधन, विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों का गहन अध्ययन किया है.

शैक्षणिक यात्रा

महंत राजेश कुमार तिवारी "रंजन" ने विभिन्न संस्थानों से डिग्री और डिप्लोमा सहित कुल 18 शैक्षणिक प्रमाण-पत्र प्राप्त किए हैं. उनकी योग्यताओं में सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से सूचना प्रणाली (Information System) में एमबीए; डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद से एलएलबी; इग्नू (IGNOU) से मनोविज्ञान, ज्योतिष और संस्कृत में एम.ए.; उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (UPRTOU) से योग में एम.ए.; हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद से हिंदी साहित्य में एम.ए.; कानपुर विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर अध्ययन; UPRTOU से भौतिकी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के साथ बी. एस॰सी॰; छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से हिंदी, दर्शनशास्त्र और राजनीति विज्ञान के साथ बी.ए.; मध्यमा विशारद; NIELIT से 'ओ' लेवल (O Level) डिप्लोमा; आरटीआई (RTI) में डिप्लोमा; इसके अलावा स्कूली एवं इंटरमीडिएट शिक्षा शामिल है.

उनकी शैक्षणिक रुचि मानविकी, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, कानून, संस्कृत, योग और भारतीय दर्शन तक विस्तृत है. वह शिक्षा को केवल योग्यताओं का संचय नहीं, बल्कि बौद्धिक अन्वेषण, आत्म-विकास और समझ की एक निरंतर प्रक्रिया मानते हैं.

उनकी इस शैक्षणिक उपलब्धि को 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' द्वारा मान्यता दी गई, जिसने उन्हें 18 शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों (डिग्री और डिप्लोमा) के लिए 'आईबीआर अचीवर' (IBR Achiever) घोषित किया. उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड 1985 से 2024 तक के हैं, और प्रस्तुत रिकॉर्ड व साक्ष्यों के सत्यापन के बाद 'इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स' के संपादकीय बोर्ड द्वारा इस उपलब्धि की पुष्टि 23 सितंबर, 2025 को की गई.

साहित्यिक यात्रा

Rajesh Kumar Tiwari “Ranjan” (महंत राजेश कुमार तिवारी "रंजन”) युवावस्था से ही कविता और रचनात्मक लेखन से जुड़े रहे हैं. उनकी शुरुआती काव्य-कृति "जड़ावरण" (Jadvaran) वर्ष 1986 में 17 वर्ष की आयु में लिखी गई थी. यह युवावस्था की भावनात्मक और काल्पनिक दुनिया से उपजी है तथा प्रकृति, प्रेम, वियोग, संवेदनशीलता, अनुभव और कल्पना को दर्शाती है. लगभग चार दशकों के बाद, इसकी मूल भावनात्मक और साहित्यिक चेतना को सुरक्षित रखते हुए इसे समकालीन पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया.

उनकी एक अन्य महत्वपूर्ण प्रारंभिक कृति "इन्द्रधनुष" (Indradhanush) वर्ष 1990 में प्रकाशित हुई थी. इसके पश्चात उनका साहित्यिक योगदान कविता, भक्ति-रचनाओं, दार्शनिक व चिंतनपरक लेखन और गद्य तक विस्तारित हुआ.

उनकी प्रकाशित व सूचीबद्ध कृतियाँ निम्नलिखित हैं:

ये कृतियाँ उनकी साहित्यिक और रचनात्मक यात्रा के विभिन्न चरणों का प्रतिनिधित्व करती हैं.

“शिवतांडवक” – एक विशिष्ट भक्ति-रचना

"शिवतांडवक” भगवान शिव को समर्पित एक मौलिक भक्ति-रचना है, जिसकी रचना Rajesh Kumar Tiwari "Ranjan" ने की है. यह रावण द्वारा रचित पारंपरिक 'शिव तांडव स्तोत्र' से पूरी तरह भिन्न है.

लेखक के संस्मरण के अनुसार, "शिवतांडवक" वर्ष 1988 में तब लिखा गया था जब वह 17 वर्ष के थे और लखनऊ के क्रिश्चियन पीजी कॉलेज में बी.एस॰सी॰ के छात्र थे. इस रचना में भक्ति-भाव, संस्कृतनिष्ठ शब्दावली, काव्य-लय, शैव दर्शन और आध्यात्मिक बिंबों का अद्भुत समन्वय है. यह युवा कवि की रचनात्मकता और भगवान शिव के प्रति उनकी अगाध भक्ति को एक सूत्र में पिरोती है. "शिवतांडवक" ज्योतिर्लिंग शिवमठ की भक्ति-परंपरा से भी जुड़ा हुआ है, जहाँ इसका नियमित पाठ किया जाता है.

आध्यात्मिक जीवन और ज्योतिर्लिंग शिवमठ

वर्ष 1998 से, महंत राजेश कुमार तिवारी "रंजन" लखनऊ स्थित 'ज्योतिर्लिंग शिवमठ' के महंत के रूप में सेवा दे रहे हैं. यह शिवमठ भगवान शिव, शिव-आराधना, रुद्राभिषेक, सनातन धर्म और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित एक आध्यात्मिक व सांस्कृतिक केंद्र है. इसकी गतिविधियों में शिव-आराधना, रुद्राभिषेक, आध्यात्मिक साधना, धार्मिक एवं सांस्कृतिक जागरूकता, गौ-सेवा, जरूरतमंदों की सहायता, पर्यावरण के प्रति सचेत रहना तथा युवा पीढ़ी को नैतिक, अनुशासित और आध्यात्मिक रूप से सार्थक जीवन जीने के लिए प्रेरित करना शामिल है.

ज्योतिर्लिंग शिवमठ की एक विशिष्ट विशेषता इसकी 'निःशुल्क रुद्राभिषेक परंपरा' है, जिसमें मंदिर में किए जाने वाले रुद्राभिषेक के लिए कोई भी निश्चित शुल्क निर्धारित नहीं है. रंजन जी के लिए आध्यात्मिकता केवल व्यक्तिगत धार्मिक आचरण तक सीमित नहीं है; यह साहित्य, संस्कृति, दर्शन, शिक्षा, सेवा और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण को समाहित करने वाले एक व्यापक विश्व-दृष्टिकोण का हिस्सा है.

साहित्य, आध्यात्मिकता और भारतीय चिंतन

रंजन जी के लेखन की एक निरंतर विशेषता मानवीय भावनाओं और भारतीय आध्यात्मिक चिंतन के बीच का परस्पर संवाद है. उनकी कविता प्रेम, युवावस्था, प्रकृति, आत्मीयता, उत्कंठा (longing), भक्ति, देशभक्ति, संवेदनशीलता, कल्पना और दार्शनिक चिंतन की पड़ताल करती है. वह साहित्य को व्यक्तिगत भावनाओं को व्यक्त करने, सांस्कृतिक स्मृति को संरक्षित करने, आध्यात्मिक विचारों को संप्रेषित करने, दार्शनिक प्रश्नों की मीमांसा करने और आत्म-चिंतन को प्रोत्साहित करने के एक माध्यम के रूप में देखते हैं.

एक आजीवन अधिगमकर्ता (Lifelong Learner)

महंत राजेश कुमार तिवारी "रंजन" की एक विशिष्ट विशेषता ज्ञान की उनकी अनवरत पिपासा है. उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड प्रबंधन, कानून, मनोविज्ञान, संस्कृत, योग, ज्योतिष, हिंदी साहित्य, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विविध विषयों के अध्ययन को प्रमाणित करता है. यह अंतःविषयी दृष्टिकोण उनके लेखन को भी प्रभावित करता है.

बहुभाषी साहित्यिक पृष्ठभूमि

महंत राजेश कुमार तिवारी "रंजन" हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्ला और संस्कृत भाषाओं का ज्ञान रखते हैं, और इन भाषाओं में पढ़ने, लिखने तथा बोलने में पूर्ण सक्षम हैं. संस्कृत और हिंदी उन्हें भारतीय आध्यात्मिक और दार्शनिक साहित्य से जोड़ती हैं, उर्दू और बांग्ला साहित्यिक परंपराओं को विस्तृत करती हैं, जबकि अंग्रेजी उन्हें समकालीन अकादमिक और वैश्विक ज्ञान स्रोतों से जोड़ती है.

परंपरा को आधुनिक दुनिया से जोड़ना

पारंपरिक भारतीय आध्यात्मिक और साहित्यिक संस्कृति से गहराई से जुड़े होने के बावजूद, Rajesh Kumar Tiwari Ranjan ने आधुनिक संचार और डिजिटल प्रकाशन को अपनाया है. jyotirlingshivmath.in के माध्यम से वह ज्योतिर्लिंग शिवमठ, अपनी साहित्यिक कृतियों, आध्यात्मिक रचनाओं और संबंधित सांस्कृतिक सामग्रियों से जुड़ी जानकारियाँ साझा करते हैं, ताकि पारंपरिक ज्ञान समकालीन तकनीक के माध्यम से सुलभ हो सके.

उनका लेखन-दर्शन

महंत राजेश कुमार तिवारी "रंजन" के साहित्यिक व्यक्तित्व के केंद्र में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, प्रकृति, मानवीय भावनाओं और ज्ञान की खोज के प्रति एक गाढ़ा जुड़ाव है. उनकी यह यात्रा किशोरावस्था में कविता लिखने से लेकर, 1986 में 'जड़ावरण' की रचना, 1988 में 'शिवतांडवक' की रचना, 1990 में 'इन्द्रधनुष' का प्रकाशन, 1998 से ज्योतिर्लिंग शिवमठ के महंत के रूप में सेवा देना, विविध शैक्षणिक योग्यताएँ अर्जित करना और 'इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स' के कीर्तिमानधारी के रूप में मान्यता प्राप्त करना—साहित्य, शिक्षण, आध्यात्मिकता और चिर-जिज्ञासा से गढ़े गए एक जीवन को दर्शाती है.

🔱 श्री ज्योतिर्लिंग शिवमठ 🔱

निःशुल्क रुद्राभिषेक और शिव पूजा – लखनऊ, उत्तर प्रदेश

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